जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान की संकल्पना
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NPE), 1986 के बाद शिक्षक शिक्षा के क्षेत्र में काफी बदलाव आया है। राष्टीय शिक्षा नीति में न केवल शिक्षा में गुणवत्ता को बल्कि अध्यापक शिक्षा की गुणवत्ता को भी रेखांकित किया गया है। देश में प्रारम्भिक शिक्षा के सार्वभौमीकरण के लक्ष्य को प्राप्त करने की संवैधानिक प्रतिबद्धता के फलस्वरूप जनपद स्तर पर जिला शिक्षा एंवम् प्रशिक्षण संस्थानों की संकल्पना अति महत्वपूर्ण तथा वर्तमान समय की आवश्यकता के अनुरूप बहुत उचित, सामयिक और प्रासंगिक है। इन सस्थानों का मुख्य उद्देश्य औपचारिक व अनौपचारिक शिक्षा व्यवस्था को सबलता प्रदान करना है।
जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान का इतिहास
डायट के पूर्व यह संस्थान ‘मुंशी प्रेमचन्द जूनियर / टीचर संस्थान नार्मल’ के नाम से कार्यरत था। नई शिक्षा नीति 1986 के योजनान्तर्गत जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान की संकल्पना की गयी। संकल्पना को मूर्त रुप देने के लिए प्रदेश के सभी जनपदों में डायट (जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान) के नाम से संस्थान आकार लेने लगा। उसी क्रम में गोरखपुर जनपद में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, पूर्व में संचालित हो रहे बी.टी.सी. (जे.टी.सी. जो अब बंद हो गया है) । 1904 के निर्मित भवन में प्रारंभ होना सुनिशिचत हुआ। ज्ञातव्य है कि यह संस्थान प्रसिद्ध शिक्षा शास्त्र ‘नार्मन’ (अपभ्रस नार्मल) के नाम से संचालित होता था। जहां पुरूष एवं महिला छात्रा-अध्यापक प्रशिक्षण प्राप्त करते थे। क्रियात्मक प्रशिक्षण हेतु ‘माडल स्कूल’ भी था। पुरूष प्रशिक्षु ‘नार्मन’ तथा महिला प्रशिक्षु ‘दीक्षा’ विधालय में प्रशिक्षण प्राप्त करती थी। यहां पर पुरूष एवं महिलाओं के लिए अलग-अलग छात्रावास, मेस की उत्तम व्यवस्था थी । पूर्व में संस्थान में छात्रावास (अब जीर्ण हो गया है), पुस्तकालय, गृह विज्ञान - प्रयोगशाला, विज्ञान प्रयोगशाला तथा संज्ञान-सहगामी विकास हेतु संसाध्न उपलब्ध् थे।
20 वीं शताब्दी के पुर्वाहः में विकसित भवनों में ही डायट गोरखपुर एवं उसके सात अनुभाग संचालित हुए। इनमें दो प्रशिक्षण हाल, पुस्तकालय, प्राचार्य, उपप्राचार्य कक्ष तथा कार्यालय संचालित हुए। नये भवन के नाम पर प्रशासनिक भवन 1993-94 में हस्तगत कराया गया, जिसे डायट गोरखपुर का प्रारंभ माना जा सकता है। संस्थान में प्राथमिक पूर्व माध्यमिक शिक्षकों का शिक्षण-प्रशिक्षण के अनेको कार्य संचालित होते रहे / हो रहे है। संस्थान बी.टी.सी. (200 सीट) दो वर्षीय (आवासीय), उर्दू बी.टी.सी. (राज्य सरकार द्वारा नियोजित), विशिष्ट बी.टी.सी. (आवश्यकता के क्रम में), तथा विविध् सेवा पूर्व / सेवारत शिक्षकों का प्रशिक्षण, पाठयक्रम समीक्षा एवं विकास, module विकास, पुस्तकों की समीक्षा तथा नवचारी अधिगम, उपचारात्मक शिक्षण, टी.एल.एम. / एस.एल.एम. इत्यादि पर प्रशिक्षण एवं साहित्य का विकास होता आ रहा है। संस्थान से प्राथमिक / उच्च प्राथमिक शिक्षकों के टी.एम.एल., प्रभावी कक्षा शिक्षण, उपचारात्मक शिक्षण, आवश्यकता आधारित, विज्ञान, भाषा गणित तथा सामाजिक विषय, मूल्यांकन, तनावमुक्त शिक्षा उपागम जैसे अनेकों पुस्तक / माडयूल का प्रकाश हुआ है। संस्थान शिक्षकों को अभिपे्ररित करने हेतु दो शिक्षा जर्नल ‘प्रभा’ एवं ‘शिक्षक संवाद’ नाम से वर्ष में एक एवं दो अंक प्रकाशित करता है।
संस्थान का भौगोलिक क्षेत्रफल काफी बड़ा है। इसका इतिहास केवल शिक्षण-प्रशिक्षण से ही नहीं जुडा है, बल्कि यहां अनेकों शिक्षा शास्त्री समाजसेवी, स्वतन्त्रता-संग्राम सेनानी तथा शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े हुए लोग रहे है । जैसे - मुंशी प्रेमचंद, फिराक गोरखपुरी, पं. विधा निवास मिश्र, आचार्य रामचंद्र शुक्ल आदि । मुंशी प्रेमचंद ने यहीं से ‘ईदगाह’, ‘दो बैलों की जोड़ी’ आदि ख्यातिलब्ध कहानियाँ लिखी। संस्थान पुराने बैरेक्स में ही चलता है। 12 वीं पंचवर्षीय योजनाओं (2012-2017) में नये भवन एवं कक्षा-कक्ष इत्यादि की मांग की गयी है।
वर्ष 1993 में असितत्व में आया जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान की पहली प्राचार्य श्रीमती राजेश्वरी कुमारी (प्रभारी) 17.07.1993 से 30.06.1995 तक कार्यरत रही। तत्पश्चात कुमारी उषा श्रीवास्तव (प्रभारी), श्री सर्वेन्द्र विक्रम बहादुर सिंह, श्रीमती कमला देवी यादव, श्री श्याम नारायण राम, श्री सदाशिव प्रसाद गुप्त, डा. व्यास मिश्र, श्री बाके सिंह, श्रीमती गायत्री मिश्रा, श्रो ओमदत्त सिंह, श्रीमती शांति जैसवार, श्रीमती मृदुला आनंद, श्री के.के. शास्त्र, Sh. Dwarika Prasad, श्री संजय सिन्हा, सुश्री विमला शास्त्री, श्री जावेद आलम आजमी, डा. इशितयाक अहमद, श्री रामधनी राम, सुश्री उर्मिला चौधरी, श्री रविन्द्र सिंह एवं वर्तमान में श्री जगदीश नारायण सिंह (प्रभारी प्राचार्य) है। संस्थान एक बेहतर शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान है।
देश -विदेश में अपनी सेवाऐं दी है तथा समाज में एक बेहतर शिक्षक के रूप में समय-समय पर अपने आप को प्रमाणित किया है। अनेंकों अच्छे कार्यों हेतु महामहिम राज्यपाल महोदय, महामहिम राष्ट्रपति महोदय तथा अन्य के द्वारा पुरस्कार एवं सम्मान मिला है।
डायट गोरखपुर प्राचार्य के संस्थान के लिए संदेश
शिक्षा स्वस्थ समाज एवं राष्ट्र निर्माण की नींव हैं। शिक्षा सामाजिक ठांचे को मजबूत करती हैं। स्वस्थ समाज एवं राष्ट्र निर्माण में शिक्षा की अहम भूमिका होती हैं। इस सबसे गुरुतर दायित्तव शिक्षकों पर विशेषकर बेसिक शिक्षकों पर होता हैं।शिक्षा अधिकार अधिनियम की अपेक्षाओं के अनुरूप समाज के अंतिम बच्चे तक शिक्षा पाहुचना हमारा परम कर्तव्य हैं। शिक्षा का आशय बच्चों में ज्ञान का स्रजन, स्वस्थ चिंतन, तक्रिक निर्णय सामाजिक सदभावना व समरसता से हैं। जिसमे उसकी अंत्नृहित शक्तियाँ नैतिक मूल्यों के साथ परिमार्जित हो सके और वहाँ ‘शिक्षार्थ आइयर- सेवार्थ जाइये’को साकार करते हुए लोकतान्त्रिक समाज के विकास में स्वस्थ योगदान कर सकें।
जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, गोरखपुर, बेसिक शिक्षा के क्षेत्र में सेवापूर्व प्रशिक्षण, सेवारत शिक्षक- प्रशिक्षण एवं शैक्षिक गुणवत्ता की नवीन आयाम देने की दिशा में अग्रसर हैं।